FANUC स्पाइरल और कोनिकल इंटरपोलेशन: L3 केवल दो चक्कर और 90° क्यों हो सकता है?
30i-A की मूल परिभाषा से बदलती त्रिज्या वाले स्पाइरल और कोनिकल इंटरपोलेशन में अधूरे चक्कर की गिनती समझें। 2.25 चक्कर और L3 का स्वनिर्मित उदाहरण त्रिज्या तथा ऊँचाई मिलाता है, ताकि पूर्णांक L को पूर्ण चक्करों की संख्या न समझें।
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बदलती त्रिज्या वाले इंटरपोलेशन में अंतिम दिशा, हर चक्कर का त्रिज्या बदलाव और चक्करों की संख्या साथ समझनी चाहिए। L3 को सीधे “तीन पूरे चक्कर” मानने से अंतिम त्रिज्या और शंकु की ऊँचाई दोनों गलत निकल सकती हैं।
यह चर्चा बदलती त्रिज्या वाले Spiral की है
FANUC 30i/31i/32i-A डिस्क्रिप्शन्स मैनुअल B-63942EN/02, §3.18, पृष्ठ 115–117 (मूल निर्माता मैनुअल की सार्वजनिक मिरर प्रति) के अनुसार Q हर चक्कर में त्रिज्या की वृद्धि या कमी है। L धनात्मक पूर्णांक है; आखिरी अधूरा चक्कर भी गिनकर ऊपर की ओर पूर्णांक लिया जाता है। L और Q में विरोध हो तो Q प्राथमिक है। कोनिकल इंटरपोलेशन चुने वृत्तीय तल के बाहर अक्षीय बदलाव जोड़ता है। XY तल में I, J केंद्र तय करते हैं और K हर चक्कर की ऊँचाई का बदलाव है। विकल्प का समर्थन संबंधित मॉडल और मशीन कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर है।
स्वनिर्मित उदाहरण: दो पूरे चक्कर और फिर एक चौथाई
XY तल का केंद्र (0,0) मानें। (24,0) से वामावर्त चलें, Q=−4 mm/चक्कर हो; Z का आरंभ 0 और प्रति चक्कर ऊँचाई बदलाव K=−8 mm हो। कुल लक्ष्य कोण 810°, यानी 2.25 चक्कर है। यहाँ L को 3 लिखना चाहिए, लेकिन कुल ज्यामितीय चक्कर अब भी 2.25 हैं।
घूम चुके चक्करों की सतत संख्या n रखें। मूल संबंध से r=24−4n, z=−8n मिलता है; n पूर्णांक काउंटर नहीं है। जाँच बिंदु ये हैं:
| सतत चक्कर संख्या n | त्रिज्या r | ऊँचाई z |
|---|---|---|
| 0 | 24 mm | 0 |
| 0.25 | 23 mm | −2 mm |
| 1 | 20 mm | −8 mm |
| 2 | 16 mm | −16 mm |
| 2.25 | 15 mm | −18 mm |
अंतिम दिशा +Y अक्ष पर है, इसलिए अंतिम बिंदु (0,15,−18) mm है। गलती से 3 पूरे चक्कर लें तो त्रिज्या 12 mm, ऊँचाई −24 mm और दिशा वापस +X मिलेगी। यह उसी टूलपथ को लिखने का दूसरा तरीका नहीं है।
अंतिम बिंदु से पिच की उलटी जाँच भी करें
अंतिम त्रिज्या अंतर −9 mm को 2.25 चक्करों से भाग देने पर Q=−4 और ऊँचाई अंतर −18 mm को 2.25 चक्करों से भाग देने पर K=−8 मिलता है। सीधी और उलटी गणना का मेल ही इस उदाहरण के ज्यामितीय बंधनों की संगति दिखाता है। Q लगातार रेडियल बदलाव है; हर चक्कर के अंत में अचानक 4 mm भीतर कूदना नहीं।
B-63944EN/03 ऑपरेटर मैनुअल, §4.7, पृष्ठ 70–71 में प्रोग्राम के अंतिम बिंदु और गणना के अंतिम बिंदु के न मिलने पर PS5123 जाँच भी दी है। अंतर मिले तो पहले केंद्र, दिशा, अधूरा चक्कर और पिच जाँचें। अंतिम-बिंदु अंतर की टॉलरेंस बढ़ाकर ज्यामितीय विरोध न छिपाएँ।
स्थिर त्रिज्या वाली हेलिक्स से क्या अंतर है?
इस उदाहरण में त्रिज्या और ऊँचाई दोनों बदलते हैं; सामान्य स्थिर-त्रिज्या Helical मॉडल में यह रेडियल बदलाव नहीं होता। स्थिर-त्रिज्या हेलिक्स की परिधि सीधे 2.25 से गुणा करके इस टूलपथ की लंबाई नहीं निकाल सकते। यह ज्यामितीय समीक्षा उदाहरण है, जिसमें प्रवेश, रिट्रैक्शन, गति और कम्पेन्सेशन मोड शामिल नहीं; यह सीधे चलाने योग्य प्रोग्राम नहीं है। अन्य उन्नत इंटरपोलेशन देखें OPTION अनुभाग।